Go Back

17/03/2018

Success Story - Ranjana Awasthi #ArunsPathshala

Share this blog:

मैं (रंजना अवस्थी) हमेशा से ही अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रही हूं। उम्र के 26 वर्ष के पहले फैट क्या होता है इससे पूरी तरह अनभिज्ञ थी।पर बच्चे को जन्म देने के बाद ही इस बला(fat) से मेरा परिचय हुआ। तब पता चला कि मेरे बीते सारे सालो की मक्कारिया अब ऐसे मेरे शरीर से फैट के रूप में जा चिपकी जो बिना कोई शारीरिक मेहनत कर ना जाने वाली। हालांकि इस्वर की कृपा से मेरा वजन कभी भी ज्यादा ना रहा था।फिर भी मेरा अंतर्मन मुझे बताता रहा कि कुछ तो गड़बड़ है। कहते है हर शरीर मे एक डॉक्टर भी छुपा होता है बस आपके पास समय हो उसको सुनने का। मैंने भी एक जांच कराई उसमें मेरा बॉडी फैट थोड़ा सा बढ़ा हुआ औऱ मेटाबोलिज़म घटा हुआ था। वैसे तो मेरे घर पर तली हुई चीजें महीनों में शायद कभी बनती हो, मिठाई खरीद के खाये हुए जमाने हुए होंगे अर्थात हम हमेशा से ही कभी भी किसी भी चीज की अति नही करते थे फिर भी मुझे बाहर जाने पर अपने ऊपर खाने का कंट्रोल बिल्कुल नही पसंद था।ठेले वाले खाने के आइटम, कोल्ड ड्रिंग, वगैरह मेरे पसंदीदा चीजे थी अर्थात मैं अपने पसंदीदा चीजो को जरूर पाना चाहती थी पर कहते हैं ना हर चीज की कोई न कोई कीमत जरूर होती है। इन पसंदीदा चीजो को अगर मैं हमेशा पाना चाहती थी तो उसकी कीमत थी " शारीरिक मेहनत" ।
इसके लिए मैं कुछ जिम गयी, योगा क्लासेज गयी, हेल्थ सेंटर्स गयी पर सभी एक या दो महीने बाद छूट गए। एक-दो साल ऐसे ही कट गए, कभी कोई सेन्टर, कभी कोई जिम, कभी कोई योगा क्लास। सर्दी में सर्दी होती इसलिए नही जाती थी, गर्मी में गर्मी बहुत और फिर बरसात का तो क्या कहना!!!
‎धीरे-धीरे मैंने टहलना सुरु किया, फिर कुछ फैमिली मेंबर ने एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया जिसमे डेली अपनी वाक शेयर करनी होती थी, धीरे से रनिंग भी स्टार्ट की हमने, वहाँ से मेरी एक आदत मजबूत हुई। थोड़े दिनों बाद फिर से सर्दियां आईं और।।।।। सर्दी में तो सर्दी बहुत पड़ती ही है।
‎फिर मेरी मुलाकात लखनऊ के अरुण पाठशाला फिटनेस ग्रुप से हुई, वहाँ से रनिंग का एक नया ही सिलसिला चल पड़ा। वास्तव में जब आप मोटिवेटेड होते है तो वो थोड़े देर के लिए पर जब आप इंस्पायर्ड होते है तो हमेशा के लिए, और इस ग्रुप में मुझे इंस्पिरेशन देखने को मिला। इस इंस्पिरेशन का ही कमाल था कि मैं ग्रुप जॉइन करने के 2 माह में ही 10 km मैराथन में हिस्सा ले पाए साथ ही group में फुल मैराथन करने वालो के बीच अगर आप 2km भी रन करते है तो वो आपको ऐसे ट्रीट करते थे मानो आप कोई मैराथन विनर रहे हो। सच भी तो है हर एक व्यक्ति खुद से मेराथन ही तो लड़ता है जब वो अपनी सुरुआत की रनिंग कर रहा होता है। ग्रुप की खास बात ये लगी कि अगर आपकी मैक्सिमम लिमिट 3 km है तो अरुण पाठशाला ग्रुप के साथ कब आपके 5km हो जाएंगे पता ही नही चलेगा। मैं कोई प्रोफेसिनल रनर नही हूँ मैं तो बस जिंदगी को अच्छे से एन्जॉय कर सकूं इसलिए रनिग शुरू की थी इसी group के माध्यम से 50 डे रनिंग challenge में भाग लिया । पहले ही दिन 6km किये की तभी अगले ही दिन कुछ दिनों के लिए मेरे बेटे के स्कूल बंद हो रहे थे,कैसे उसे कहाँ छोड़ के रनिंग करूँगी तो तुरंत कुछ दिन के लिए मैंने जिम जॉइन किया जहा अपने बच्चे को ले जा कर मैं ट्रेडमिल पे रन कर सकती थी और कर भी रही हूं।
‎"अब मैं रनिंग ना कर पाने के बहाने नही बल्कि कैसे कर पाऊंगी उसके रास्ते खोजती हूँ।"
‎क्योकि मेरे अंदर 50 डेज रनिंग चलेंज को पूरा करने का जुनून है वो भी इसलिए क्योकि यही एक रास्ता था जिससे मैं रनिंग की आदत को डाल सकती थी।
‎मेरे एक विदेश में रहने वाले भारतीय मित्र ने पूछा कि अरुण पाठशाला को फाइनेंसियल क्या फायदा होता होगा जो वो ऐसा grp रन कर रहा है। मैं बोली यही तो कुछ सबसे बड़ी खास बातें है grp की कि ये जो इतना इंस्पिरेशन, डेडिकेशन है इन सबका कोई भी शुल्क नही, इवन तुम भी जब लखनऊ आके कुछ दिन हमारे साथ ग्रुप में बिताओगे तो बाहर कहि भी रहोगे जैसे ही कोई मौका मिलेगा grp के साथ समय बिताने का जरूर बिताओगे।
‎सो I took my 50 day running challenge.....Will complete it....Any how....
Success Story - Ranjana Awasthi  #ArunsPathshala


Written by: Wellness Event
Share this blog: